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सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

"मुझको दर्पण दिखलाया क्यों?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


मेरे वैरागी उपवन में,
सुन्दर सा सुमन सजाया क्यों?

सूने-सूने से मधुबन में,
गुल को इतना महकाया क्यों?

मधुमास बन गया था पतझड़,
संसार बन गया था बीहड़,
दण्डक-वन से, इस जीवन में,
शीतल सा पवन बहाया क्यों?

दिन-रैन चैन नही आता था,
मुझको एकान्त सुहाता था,
चुपके से आकर नयनों में,
सपनों का भवन बनाया क्यों?

नही हँसता था, नही रोता था,
नही अन्तर्मन को धोता था,
चुपके से आकर आँगन में,
मुझको दर्पण दिखलाया क्यों?

स्वर नहीं सजाना आता था,
ना साज बजाना आता था,
चुपके से कानों में आकर,
सुन्दर संगीत सुनाया क्यों?

23 टिप्‍पणियां:

  1. कोमल प्रश्न उठाता प्रेम का अधिकार..

    उत्तर देंहटाएं
  2. इसलिए कि -

    अधरों से टपकते गीत तेरे
    नजरों से नज्म नजाकत की.
    तेरी जुल्फ कथा का सागर है.
    लगती बिंदिया यह हाइकू सी.

    यह रंगीन वस्त्र पूरा साहित्य,
    इसमें फूल खिले,वह चम्पू है.
    तेरे आँचल नाट्य-कहानी है,
    तू परियों के देश की रानी है.

    चितवन से बहे कविता की धार
    और चाल गजल मदहोश करे.
    कहीं और भरूँ मै गागर क्यों?
    जब तू ही प्यार का सागर है.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. तिवारी जी,..शास्त्री जी के इस रचना का आपसे अच्छा दूसरा कोई जबाब(टिप्पणी)हो ही नही सकती,आपकी इस काव्य भरी टिप्पणी का को पढकर मै आपका मुरीद हो गया हूँ,शास्त्री जी के साथ आपकी रचना बहुत अच्छी लगी,....बधाई शुभकामनाए.....

      NEW POST काव्यान्जलि ...: चिंगारी...

      हटाएं
  3. मुझको संगीत सुनाया क्यों ,बैरागी मन बहलाया क्यों अच्छा बिम्ब और प्रतीक विधान .

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut bhavpoorn khoobsoorat chitron se sazi ek sahejne yogya prastuti.badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  5. कोमल भावों से सजी सुन्दर प्रस्तुति |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  6. दिन-रैन चैन नही आता था,
    मुझको एकान्त सुहाता था,
    चुपके से आकर नयनों में,
    सपनों का भवन बनाया क्यों?
    Bahut Sundar 1

    उत्तर देंहटाएं
  7. सहज सरल उत्तर है प्रियवर,
    सतत-सात्विक नेह दिखा है ।

    वास कर रही पुण्यात्मा,
    दृग्भक्ती दृढ़-देह दिखा है ।।


    दिनेश की टिप्पणी - आपका लिंक

    http://dineshkidillagi.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  8. चुपके से आकर आँगन में,
    मुझको दर्पण दिखलाया क्यों?
    सुन्दर मनमोहक सृजन शुक्रिया सर !

    उत्तर देंहटाएं
  9. टिप्पणिया आनन्द को और बढ़ा देती हैं.धन्यवाद शास्त्री जी.

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत खूब लिखा है इस रचना के लिए आभार
    नई पोस्ट पर आपका स्वागत है !

    Active Life Blog

    उत्तर देंहटाएं
  12. आसक्ति और स्नेह का सुन्दर एहसास, मन मोहक शब्दों में .

    उत्तर देंहटाएं
  13. मधुमास बन गया था पतझड़,
    संसार बन गया था बीहड़,
    दण्डक-वन से, इस जीवन में,
    शीतल सा पवन बहाया क्यों?

    प्रेम आपकी अपनी कोमल भावना का ही पल्लवन और प्रक्षेपण है .

    उत्तर देंहटाएं
  14. Sahi main shastri ji ki ye rachana ke saath saath tiwari ji ki tipnrhi bahut sateak lagi. dhanyawaad.

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत ख़ूबसूरत रचना...आभार

    उत्तर देंहटाएं

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