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मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

"निर्वाचन का दौर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


भारत की महानता का, नही है अतीत याद,
वोट माँगने को, नेता आया बिनबुलाया है।
देश का कहाँ है ध्यान, होता नित्य सुरापान,
जाति, धर्म, प्रान्त जैसे, मुद्दों को भुनाया है।
युवराज-सन्त चल पड़े, गली-हाट में,
निर्वाचन के दौर ने, ये दिन भी दिखाया है।

14 टिप्‍पणियां:

  1. निर्वाचन पर हो गए, मतदाता निर्वाक्य ।
    राहुल बाबा पर कहाँ, करते टिप्पण शाक्य ।

    करते टिप्पण शाक्य, नगर गौतम श्रावस्ती ।
    नंगे दारुबाज, सजी मस्ती की बस्ती ।

    फँसे गुरु निर्वचन, करे नेतागण मंचन ।
    नौटंकी को लाज, अजी तिकड़म निर्वाचन ।।

    दिनेश की टिप्पणी - आपका लिंक

    http://dineshkidillagi.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  2. युवराज-सन्त चल पड़े, गली-हाट में,
    निर्वाचन के दौर ने, ये दिन भी दिखाया है।
    युवराज मंत मति को आपने युवराज संत कैसे कह दिया
    रचना संक्षिप्त और सुन्दर है .

    उत्तर देंहटाएं
  3. कहत ये रूपचंद शास्त्री मयंक आज
    चुनावों में मुखौटा सभी ने चढाया है ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया,चुनावों में मुखौटा सभी ने चढाया है ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सब कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है
    चुल्लू भर जनता के हिस्से,इनके हिस्से सागर है,
    छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी
    अंधियारे बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी,

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,.....
    ________________

    उत्तर देंहटाएं
  6. इन दिनों सब कुछ सतह पर आ जाता है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. कुक्कुरमुत्ता उग गये,हर घूरे के ढेर |
    ईश्वर ईश्वर छोड़ कर,'नेता, नेता' टेर ||
    'नेता नेता'टेर,तुझे निज पीठ बिठाये |
    'हाँ जी,हाँ जी'अगर नहीं की,तुरत गिराए ||
    बड़ा बुरा हो हांल,हो ज्यों 'खुजली का कुत्ता'|
    पायेगा 'हर खाद',बने जो 'कुक्कुर्मुत्ता' ||

    उत्तर देंहटाएं

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