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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

"आदरणीय “रविकर” जी को समर्पित-पाँच दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


आदरणीय रविकर जी ने
मेरे चित्र पर दो टिप्पणियाँ की थी!
रविकर Feb 21, 2012 04:16 AM
गेहूं जामे गजल सा,
सरसों जैसे छंद |
जामे में सोहे भला,
सूट ये कालर बंद ||
प्रत्‍युत्तर दें
उत्तर
रविकर Feb 21, 2012 04:19 AM
सुटवा कालर बंद ||
उसी के उत्तर में पाँच दोहे
आदरणीय रविकर जी को
समर्पित कर रहा हूँ!
-0-0-0-0-0-
रविकर जी को भा रहा, अब भी मेरा रूप
वृद्धावस्था में कहाँ, यौवन जैसी धूप।१।

गेहूँ उगता ग़ज़ल सा, सरसों करे किलोल।
बन्द गले के सूट में, ढकी ढोल की पोल।२।

मौसम आकर्षित करे, हमको अपनी ओर।
कनकइया डग-मग करे, होकर भावविभोर।३।

कड़क नहीं माँझा रहा, नाज़ुक सी है डोर।
पतंग उड़ाने को चला, बिन बाँधे ही छोर।४।

पत्रक जब पीला हुआ, हरियाली नहीं पाय।
ना जाने कब डाल से, पका पान झड़ जाय।५।

30 टिप्‍पणियां:

  1. सही उत्तर दिया सभी दोहे लाजबाब ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. माता होय कुरूप अति, होंय पिता भी अंध |
    वन्दनीय ये सर्वदा, अतिशय पावन बंध ||
    बंध = शरीर

    उच्चारण अतिशय भला, रहे सदा आवाज |
    शब्द छीजते हैं नहीं, पञ्च-तत्व कर लाज ||

    देव आज देते चले, फिर से पैतिस साल |
    स्वस्थ रहेंगे सर्वदा, नौनिहाल सौ पाल ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

    उत्तर देंहटाएं
  4. शब्द नहीं हैं इस अभिव्यक्ति के लिए ..वाह बहुत बहुत बहुत अच्छा ..
    kalamdaan.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

    उत्तर देंहटाएं
  6. शास्त्री जी...खूबसूरत दोहे...वृद्ध हों आपक़े दुश्मन...

    उत्तर देंहटाएं
  7. रविकर जी की टिप्पणी का सुंदर दिया जबाब
    सभी दोहे अच्छे लगे,हम हो गए लाजबाब...

    बहुत बेहतरीन प्रस्तुति...शास्त्री जी बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  8. काश की ऐसा प्रत्युत्तर हमें भी मिला होता तो हमारा अहोभाग्य होता ..:) रविकर जी के दोहे का जवाब लाजवाब है...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. डॉ.नूतन गैरोला जी!
      दोहे तो मैंने लिखे हैं।
      रविकर जी को तो समर्पित किये हैं!
      --
      दो दोहे आपके लिए भी है न!

      नूतन गैरोला नहीं, करती हैं परिहास।
      इसीलिए उनके लिए, लिखा नहीं कुछ खास।१।

      घर के बड़े बुजुर्ग को, जो देते सम्मान।
      उनका देश-समाज में, बढ़ जाता है मान।२।

      हटाएं
    2. बहुत अच्छा लगा .. आपका बहुत बहुत धन्यवाद .... अब तो आपसे दोहे लिखवाने के लिए कुछ मजाक वजाक का सहारा लेना पड़ेगा... :)).. ...दूसरा दोहा तो बेहद सुन्दर और बहुत अच्छे भावों को ले कर बनाया है...जो बिलकुल सही है .. ... सादर

      हटाएं
  9. रूप चंद्र रस पान करें , रवि रतनारे नैन
    सरसों सरसी सुर सधे,मधुर मधुर मधु बैन.

    गेहूँ गाय गीत गज़ल, सरसों करे सिंगार
    नील वसन में श्याम जू,मानो आये द्वार.

    शौक हुआ सिलवा लिया, बंद गले का सूट
    सजनी गर तारीफ करें , पैसे जायें छूट.

    नेह रेशमी डोर फिर , माँझे का क्या काम
    प्रेम पतँगिया झूमती, ज्यों राधा सँग श्याम.

    ऋतु आवत जावत रहे, पतझर पाछ बसंत
    प्रेम पत्र कब सूखता ? इसकी आयु अनंत.

    शास्त्री जी व रविकर जी को सादर............

    उत्तर देंहटाएं
  10. जबरदस्त ये भाव हैं, निगमागम का रूप ।

    तन-मन मति निर्मल करे, कुँवर अरुण की धूप ।।

    दिनेश की टिप्पणी - आपका लिंक
    dineshkidillagi.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  11. इन दोहों ने तो गजब ही ढा दिया। बेहतरीन।

    उत्तर देंहटाएं
  12. मौसम आकर्षित करे, हमको अपनी ओर।
    कनकइया डग-मग करे, होकर भावविभोर।३।
    रविकर जी से सहमत .सौन्दर्य का पल्लवन है बुढापा .'भले पत्ता टूटा डाल से ले गई पवन उडाय,अबके बिछुड़े कब मिलें ,दूर पड़ेंगें जाय '/'माली आवत देख के कलियाँ करें पुकार ,फूली फूली चुन लई,कल्ल ,हमारी बार .'

    सहमत नहीं हूँ मैं जीवन की निस्सारता से .क्षण भंगुरता से .एक क्षण में भरपूर जीवन होता है जीवन का नखलिस्तान पल दो पल का ही होता है जो ताउम्र प्रिय लगता है , इसलिए .

    उत्तर देंहटाएं
  13. नेह रेशमी डोर फिर , माँझे का क्या काम
    प्रेम पतँगिया झूमती, ज्यों राधा सँग श्याम.

    ऋतु आवत जावत रहे, पतझर पाछ बसंत
    प्रेम पत्र कब सूखता ? इसकी आयु अनंत.

    सहमत हैं इस फलसफे से हम भी अरुण कुमार निगम जी के .

    उत्तर देंहटाएं
  14. आकाशवाणी सूरतगढ़ (कॉटन सिटी चैनल) आज आपकी सेवा करते हुए ३१ वर्ष का हो गया है .इस केंद्र व इस जिले (श्री गंगानगर ) का प्रथम उद्ध्घोषक होने के नाते मेरी सेवायों को सभी सुनने वालों का भरपूर प्यार मिला है और मिल रहा है .इस अवसर पर आप सभी को मेरी तरफ से हार्दिक बधाई,धन्यवाद् .शुभकामनाएं .आशा करता हूँ आपका प्यार इसी तरह से मुझे व चैनल को मिलता रहेगा
    Dr.JOGA SINGH KAIT "JOGI"
    M.D.ACUPRESSUR
    NATUROPATH
    SR.ANNOUCER
    ALL INDIA RADIO,
    SURATGARH
    http://drjogasinghkait.blogspot.com
    ईमेल-kait_jogi@yahoo.co.in
    dr.kait.jogi@gmail.com
    DRKAIT@HOTMAIL.COM
    cell no.09414989423

    उत्तर देंहटाएं
  15. वाह !! भाव बिभोर कराता वार्तालाप.

    चर्चामंच पर करते रहें कविवर वार्तागान,
    'भ्रमर' बन करते रहें 'हम'भी मधुरस पान.

    उत्तर देंहटाएं
  16. . बढ़िया उत्तर...निगम जी कविता भी बेहतरीन है...

    उत्तर देंहटाएं
  17. गेहूँ उगता ग़ज़ल सा, सरसों करे किलोल।
    बन्द गले के सूट में, ढकी ढोल की पोल।२।.........
    हा हा हा ...........

    उत्तर देंहटाएं

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