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गुरुवार, 27 सितंबर 2012

♥ गणेशोत्सव पर विशेष ♥ (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


 ♥ गणेशोत्सव पर विशेष ♥
मित्रों! इन दिनों गणेशकोत्सव की धूम है!
इस अवसर पर
मेरी जीवन संगिनी
श्रीमती अमर भारती के स्वर में!
मेरी लिखी हुई यह गणेश वन्दना सुनिए
और आप भी साथ-साथ गाइए!

 

विघ्न विनाशक-सिद्धि विनायक।
कृपा करो हे गणपति नायक!!

सबसे पहले तुमको ध्याता,
चरणयुगल में शीश नवाता,
आदि देव जय-जय गणनायक।
कृपा करो हे गणपति नायक!!

पार्वती-शिव के तुम नन्दन,
करते सभी तुम्हारा वन्दन,
सबको देते फल शुभदायक!
कृपा करो हे गणपति नायक!!

लेकर धूप-दीप और चन्दन,
सारा जग करता अभिनन्दन,
मैं अबोध अनुचर अनुगायक!
कृपा करो हे गणपति नायक!!

मूषक-मोदक तुमको प्यारे,
विपदाओं को टारनहारे,
निर्बल के तुम सदा सहायक!
कृपा करो हे गणपति नायक!!

13 टिप्‍पणियां:

  1. उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. हे जन-गण के ईश सुनो!
    तुम्हें नवाता शीश सुनो !!
    नत मस्तक हूँ शंकर सूत !
    दो जग को आशीष सुनो !!
    रचना अच्छी है |साधुवाद!!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर गणेश वंदना.....आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह,,,बहुत खूब शास्त्री जी,,,
    लाजबाब गणेश वंदना,आप दोनों को सुन्दर गणेश वंदना लिखने की बधाई,शुभकामनाएं,,,,

    RECENT POST : गीत,

    उत्तर देंहटाएं
  5. कानों में पीयूष की फुहार-सी बरसा गये वंदना के स्वर -आप दोनो को नमन !!

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह!
    शब्द और स्वर
    दोनो बहुत ही सुंदर !

    उत्तर देंहटाएं
  7. आनुप्रासिक छटा बिखेर दी है आपने इन पंक्तियों में गीत तो खुद ही गायन हार भी बना हुआ है गेयता से भरा हुआ है .स्वर भी अर्थ भी प्रस्तुति भी .

    उत्तर देंहटाएं
  8. आनुप्रासिक छटा बिखेर दी है आपने इन पंक्तियों में गीत तो खुद ही गायन हार भी बना हुआ है गेयता से भरा हुआ है .स्वर भी अर्थ भी प्रस्तुति भी .धुन और बंदिश दोनों सहज माधुर्य से संसिक्त .

    उत्तर देंहटाएं

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