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सोमवार, 29 अक्तूबर 2012

"रिश्वत में गुम हो गई प्राञ्जलता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गली गाँव की अब सड़क बन गई है।
नाजुक लता अब कड़क बन गई है।।

समय को बदलते नही देर लगती,
हैवानियत अब हड़क बन गई है।

दिखाई नही दे रही सादगी अब,
पौशाक कितनी भड़क बन गई है।

रिश्वत में गुम हो गई प्राञ्जलता,
जुगाड़ों में सीधी मड़क बन गई है।

जहाँ न्याय, अन्याय पर ही टिका हो,
वो आजादी बेड़ा-गड़क बन गई है।

प्रजातन्त्र का तो, हुआ "रूप" ओझल,
यहाँ ज़िन्दगी अब नरक बन गई है।

18 टिप्‍पणियां:

  1. प्रजातन्त्र का तो, हुआ "रूप" ओझल,
    यहाँ ज़िन्दगी अब नरक बन गई है।
    बिलकुल, हालात एकदम यही हैं, सुन्दर वर्णन !

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक से बढ़कर एक गजल आ रही हैं
    गुरु जी आजकल-
    बधाई स्वीकारें ||

    रिश्वत अस्मत से रहे, किस्मत आज खरीद |
    मंहगाई में रोज वे, मना रहे बकरीद |
    मना रहे बकरीद, यहाँ पर होते फांके |
    हवा रहे हम फांक, लगाते दुष्ट ठहाके |
    तड़क-भड़क ये सड़क, करे उनका नित स्वागत |
    किस्मत अपनी रोय, बचा के रखते अस्मत ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्या कहा जाए ! बात तो सही ही है !
    देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान...
    ~सादर !

    उत्तर देंहटाएं
  5. एक अवगुण सभी गुणों पर ग्रहण लगा देता है...भ्रष्टाचार ऐसा ही दुर्गुण है जिसने हिंदुस्तान को नरक बना दिया है...

    उत्तर देंहटाएं
  6. कल तक सब कुछ अच्छा ही था, आज समझ से परे हो गया,
    जिनको स्थिर मानक समझा, उनका ही आधार खो गया।

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्रजातन्त्र का तो, हुआ "रूप" ओझल,
    यहाँ ज़िन्दगी अब नरक बन गई है।
    बहुत सुन्दर रचना है बस चित्र असंगत है अब कौन मेज़ के नीचे से रिश्वत लेता है .क़ानून का फंडा डाल फंड खाता है आदमी ,सरे आम सुबह शाम तरक्की पाता है आदमी .

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर कुछ अलग तरह की सामयिक रचना बहुत पसंद आई बदलते परिवेश का सच्चा दर्पण बहुत बहुत बधाई आपको

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  9. बिल्‍कुल सही ..
    आज की दुनिया वैसी ही है ..

    उत्तर देंहटाएं
  10. कहाँ सादगी,कहाँ इमानदारी .... किसी भुल्भुलैये में गम है

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  11. सही है जी ....इस गन्दी राजनीति ने सब कुछ बदल कर रख दिया है

    उत्तर देंहटाएं
  12. 'रिश्वत के शैतान'को, दी है 'अच्छी चोट !
    बिना चोट के मिट नहीं,सकता है यह खोट !!
    शैतानी यह खोट,मिटी इससे 'मानवता' |
    'शैतानियत'जगाई,इसने,बढ़ा के'कटुता' ||
    मीत, तुम्हारी बात सही है,मैं हूँ सहमत |
    देश 'स्वर्ग'बन् जाय,अगर मिट जाये 'रिश्वत'||

    उत्तर देंहटाएं
  13. कल 02/11/2012 को आपकी यह खूबसूरत पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं

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