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शनिवार, 11 मार्च 2017

होली गीत "खिलता फागुन आया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


आँचल में प्यार लेकर, 
भीनी फुहार लेकर. 

आई होली, आई होली, 

आई होली रे! 

चटक रही सेंमल की फलियाँ, 
चलती मस्त बयारें। 
मटक रही हैं मन की गलियाँ,  
बजते ढोल नगारे। 

निर्मल रसधार लेकर, 
फूलों के हार लेकर, 
आई होली, आई होली, 
आई होली रे! 

मीठे सुर में बोल रही है, 
बागों में कोयलिया। 
कानों में रस घोल रही है, 
कान्हा की बाँसुरिया। 

रंगों की धार लेकर, 
सुन्दर शृंगार लेकर,  
आई होली, आई होली, 
आई होली रे! 

लहराती खेतों में फसलें, 
तन-मन है लहराया. 
वासन्ती परिधान पहनकर, 
खिलता फागुन आया, 

महकी मनुहार लेकर, 
गुझिया उपहार लेकर, 
आई होली, आई होली, 
आई होली रे!

2 टिप्‍पणियां:

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