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मंगलवार, 10 अक्तूबर 2017

दोहे "रहे न खाली हाथ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


त्यौहारों पर किसी का, रहे न खाली हाथ।
पञ्च पर्व दीपावली, लाती अपने साथ।।

नौ दिन ही नवरात्र के, होते पुत्री पर्व।
देवी हैं सब बेटियाँ, जिन पर हमको गर्व।।

विजय पर्व के बाद में, लोग हुए निःशंक।
अँधियारे को चीरकर, नभ में हँसे मयंक।।

साजन-सजनी के लिए, चौथ दिवस है खास।
सजनी करवाचौथ पर, रखती है उपवास।।

कुलदीपक के है लिए, पर्व अहोई खास।
होती अपने तनय पर माताओं को आस।।

खुश हो करके बाँटिए, लोगों को उपहार।
मास कार्तिक में बहुत, आते हैं त्यौहार।।

चाहे कोई वार हो, कोई हो तारीख।
संस्कार देते हमें, कदम-कदम पर सीख।।



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